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जंतर मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ SC में याचिका, पीएम मोदी की 'चुप्पी' पर सवाल

याचिका के तहत सुप्रीम कोर्ट से यह मांग की गई कि किसी व्यक्ति के अपराध का दोषी पाए जाने पर चाहे वह किसी भी पद पर हो, उचित एफआईआर दर्ज की जाए और उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया जाए. विपक्षी दलों द्वारा पीएम मोदी की 'चुप्पी' पर सवाल उठाना मुख्य रूप से सरकार की जवाबदेही तय करने की रणनीति है। हाल ही में, NEET और UGC-NET पेपर लीक के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और परीक्षाओं में धांधली जैसे मुद्दों पर उनकी खामोशी पर विपक्ष ने तीखे सवाल उठाए हैं।

Gaurav Dwivedi
July 21, 2026
4 min read
जंतर मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ SC में याचिका, पीएम मोदी की 'चुप्पी' पर सवाल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस के बर्बरतापूर्ण एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. कोर्ट में दाखिल लेटर पिटीशन के जरिए यह मांग की गई है कि मामले पर सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लें. साथ ही उसकी देखरेख में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच का गठन हो या किसी स्वतंत्र एजेंसी से पूरे मामले जांच का निर्देश दें.कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील नरेंद्र मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष लेटर पिटीशन (Letter Petition) दाखिल किया. उनका कहना है कि वह सीजेआई की बेंच के समक्ष इस मुद्दे को उठाएंगे. लेटर पिटीशन वो प्रक्रिया है, जिसके तहत कोई भी व्यक्ति या संस्था सीधे सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज को पत्र लिखकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है. कोर्ट इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर सकता है.विपक्षी दलों द्वारा पीएम मोदी की 'चुप्पी' पर सवाल उठाना मुख्य रूप से सरकार की जवाबदेही तय करने की एक राजनीतिक रणनीति है। हाल ही में NEET-UGC NETपेपर लीक के मामले दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और परीक्षाओं में धांधली जैसे मुद्दों पर उनकी खामोशी पर विपक्ष ने तीखे सवाल उठाए हैं।कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर सीधे हमला बोलते हुए कहा है कि छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर पीएम को माफी मांगनी चाहिए।

यह अक्सर देखा गया है कि जब भी देश में कोई बड़ा विवाद या राष्ट्रीय संकट उत्पन्न होता है, तब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या तो सीधे बयान देने से बचता है या संबंधित मंत्रालयों (जैसे शिक्षा मंत्रालय) और आधिकारिक प्रवक्ताओं के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करता है।

विपक्ष का आरोप है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत चुप्पी आम जनता और प्रभावित लोगों (जैसे युवाओं और छात्रों) के मनोबल को प्रभावित करती है और सरकार को जवाबदेही से बचाती है।

इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को बचाना होगा

साथ ही इस याचिका में जमा की गई करीब 100 वीडियो रिकॉर्डिंग वाली पेन ड्राइव सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर विचार करने के बाद, दिल्ली पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए कोर्ट की देखरेख में स्वतंत्र न्यायिक जांच का गठन किए जाए या फिर किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराए जाने का निर्देश दे.

कोर्ट से यह भी जांच कराने के आदेश देने की गुजारिश की गई है जिसमें सादे कपड़ों में उन लोगों की पहचान की जाए. साथ ही जांच के निर्देश भी दिए जाएं जिन्होंने कथित तौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला किया. यह भी पता लगाया जाए कि क्या उन्होंने किसी आधिकारिक अधिकार, निर्देश या समर्थन के तहत ऐसा किया था.

याचिका के तहत कोर्ट से यह मांग की गई है कि किसी व्यक्ति के अपराध का दोषी पाए जाने पर चाहे वह किसी भी पद पर हो, उचित एफआईआर दर्ज की जाए और उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया जाए.

साथ ही सबूतों को नष्ट होने, छेड़छाड़ होने या उन्हें दबाए जाने से रोकने के लिए सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूतों (सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन वीडियो, ड्रोन फुटेज, सोशल मीडिया रिकॉर्डिंग, पुलिस संचार रिकॉर्ड, बॉडी-कैमरा फुटेज) और अन्य सभी संबंधित सामग्री को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए. इसके अलावा यह भी मांग की गई है कि किसी भी गैर-कानूनी या अत्यधिक बल प्रयोग के कारण घायल पाए गए सभी लोगों को उचित मुआवजा देने और आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया जाए.

इससे पहले कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी के दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के समर्थन में कल सोमवार को नागपुर में भी सैकड़ों की संख्या में छात्रों, युवाओं और बुजुर्गों ने प्रदर्शन किया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने संकल्प लिया कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, उनका आंदोलन जारी रहेगा.

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