74KM लंबा, खर्च होंगे 4000 करोड़ और 56 गांवों से गुजरेगा… गंगा लिंक एक्सप्रेस-वे देगा नई रफ्तार!
दिल्ली-NCR, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली गंगा लिंक एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है. 4,000 करोड़ रुपए की इस परियोजना के लिए 78% भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है. आइए जानते हैं गंगा लिंक एक्सप्रेस-वे के बारे में...

दिल्ली-NCR, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और पश्चिमी यूपी की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली गंगा लिंक एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है. यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लगभग 78 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा कर लिया है. बाकी बची भूमि का अधिग्रहण जुलाई के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा. करीब 4,000 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली-NCR से लखनऊ, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुगम और सुविधाजनक हो जाएगी.
नोएडा एयरपोर्ट से सीधे जुड़ेगा गंगा एक्सप्रेस-वे
करीब 74.3 किलोमीटर लंबे गंगा लिंक एक्सप्रेस-वे का 20 किलोमीटर हिस्सा यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में बनाया जाएगा. सेक्टर-21 के पास इंटरचेंज बनाकर इसे यमुना एक्सप्रेस-वे और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ा जाएगा. इस सीधी कनेक्टिविटी से दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, लखनऊ और बुंदेलखंड के बीच आवागमन पहले से अधिक तेज हो जाएगा.
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गंगा एक्सप्रेस-वे का सीधा संपर्क स्थापित होगा. इससे हवाई यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी बड़ी राहत मिलेगी. एयर कार्गो की आवाजाही तेज होगी. परिवहन लागत में भी कमी आने की उम्मीद है.
भूमि अधिग्रहण अंतिम चरण में
अधिकारियों के अनुसार, गंगा लिंक एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है. यमुना प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में लगभग 225 हेक्टेयर भूमि में से 78 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण पूरा किया जा चुका है. शेष भूमि का अधिग्रहण जुलाई के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के शुरू किया जा सके.
इन गांवों से होकर गुजरेगा कॉरिडोर
यह कॉरिडोर गौतम बुद्ध नगर के आठ गांवों और बुलंदशहर के 48 गांवों से होकर गुजरेगा. इसके अलावा यमुना क्षेत्र के 16 गांव सीधे इस परियोजना से प्रभावित होंगे. किसानों को मुआवजा देकर तेजी से रजिस्ट्री कराई जा रही है. प्रशासन लगातार किसानों के साथ संवाद कर रहा है, ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की रुकावट न आए.
परियोजना के तहत 80 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क बनाई जाएगी. इसके दोनों ओर सर्विस रोड भी विकसित होंगी, जिससे पूरे कॉरिडोर की कुल चौड़ाई 130 मीटर होगी. यमुना क्षेत्र में सड़क ग्राउंड लेवल पर बनाई जाएगी, जबकि आवश्यकता वाले हिस्सों में इसे एलिवेटेड बनाया जाएगा.
उद्योग, व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
गंगा लिंक एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर बनने से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी स्थापित होगी. इससे औद्योगिक निवेश, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क, ट्रांसपोर्ट और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उद्योगों और किसानों को अपने उत्पाद कम समय और कम लागत में देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने में आसानी होगी. एयर कार्गो सेवाओं को भी इस परियोजना से बड़ा लाभ मिलने की संभावना है.
इन शहरों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
इस कॉरिडोर के शुरू होने के बाद दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, मेरठ, हापुड़, लखनऊ और बुंदेलखंड के बीच यात्रा पहले से अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगी. इससे रोजाना लाखों यात्रियों के साथ-साथ व्यापारियों, उद्योगपतियों, किसानों और निवेशकों को भी सीधा लाभ मिलेगा.
यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह के अनुसार, इस कॉरिडोर के निर्माण से दिल्ली-NCR, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेस-वे के बीच मजबूत संपर्क स्थापित होगा. इससे यात्रा का समय घटेगा, ईंधन की बचत होगी और क्षेत्र में नए उद्योग, रोजगार तथा निवेश के अवसर बढ़ेंगे. यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है.
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