फर्जी NOC, 20 KV की जगह 34 KV का बिजली कनेक्शन और… लखनऊ अग्निकांड में SIT की रिपोर्ट में कई बड़ी खामियां
लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत के बाद SIT ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि इमारत में आपातकालीन निकास नहीं था, केवल लिफ्ट की व्यवस्था थी. निर्धारित बिजली लोड से अधिक उपयोग किया जा रहा था, जिससे शॉर्ट सर्किट की आशंका है अग्नि सुरक्षा नियमों की घोर अनदेखी के कारण हादसा गंभीर हुआ. दोषियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है.

राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) आज अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप सकती है. इस दर्दनाक हादसे में 15 छात्रों की मौत हो गई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी का गठन कर एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए थे. मामले में बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला के खिलाफ अलीगंज थाने में एफआईआर भी दर्ज की गई थी.एसआईटी ने सात दिनों तक गहन जांच की. इस दौरान बिल्डिंग मालिक, संबंधित विभागों के अधिकारियों, प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिवारों के बयान दर्ज किए गए. इसके अलावा बिल्डिंग के निर्माण, संचालन और अग्नि सुरक्षा से जुड़े दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की गई. सभी साबूतों और दस्तावेजों को एकत्र करने के बाद अंतिम जांच रिपोर् तैयार की गई.
जांच में कई कमियां पाई गईं
जानकारी के अनुसार, एसआईटी की रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों का जिक्र किया गया है. जांच में सामने आया कि जिस इमारत में आग लगी, वहां आपातकालीन निकास (फायर एग्जिट) के लिए लोहे की सीढ़ियां होना जरूरी था, लेकिन उसकी जगह केवल लिफ्ट की व्यवस्था थी. इतना ही नहीं, उसी स्थान पर एक और लिफ्ट लगाने की तैयारी भी चल रही थी. जांच के दौरान पाया गया कि यदि बिल्डिंग के पीछे फायर एग्जिट और सुरक्षित सीढ़ियां बनाई गई होतीं, तो कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता था.
फायर सेफ्टी के नियमों का पालन नहीं
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आग लगने के बाद पूरी इमारत धुएं से भर गई थी. ऐसी स्थिति में लिफ्ट का इस्तेमाल संभव नहीं था, जिससे अंदर फंसे लोगों के बाहर निकलने के सिर्फ सकरा सीढ़ियों वाला रास्ता ही बचा था. एसआईटी का मानना है कि फायर सेफ्टी के नियमों का पालन न किए जाने से हादसे की गंभीरता और बढ़ गई.
शॉर्ट सर्किट से हुआ हादसा
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बिल्डिंग का निर्माण निर्धारित मानकों और अग्नि सुरक्षा नियमों के विपरीत किया गया था. इसके अलावा बिजली व्यवस्था में भी गंभीर लापरवाही की गई. रिपोर्ट के अनुसार, इमारत में 20 किलोवाट के स्वीकृत बिजली कनेक्शन के बजाय लगभग 34 किलोवाट का लोड इस्तेमाल किया जा रहा था. आशंका जताई गई है कि अधिक बिजली की खपत अधिक होने के कारण शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसने भीषण आग का रूप ले लिया.
अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकार की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं. यदि जांच में सामने आईं लापरवाहियों की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है.
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