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नई EPF स्कीम में ₹1800 से अधिक का कंट्रीब्यूशन अब अनिवार्य नहीं, सरकार का बड़ा कदम

पुरानी स्कीम, यानी 'इम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स स्कीम 1952' के तहत, सैलरी की जो सीमा (अभी ₹15,000 प्रति महीना) तय है, वह किसी कंपनी में शामिल होते समय कर्मचारी को अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी कवर देने के लिए मायने रखती थी.

Gaurav Dwivedi
July 3, 2026
3 min read
नई EPF स्कीम में ₹1800 से अधिक का कंट्रीब्यूशन अब अनिवार्य नहीं, सरकार का बड़ा कदम

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने नई कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना-2026 के तहत 15,000 रुपए मासिक वेतन सीमा से ऊपर के अंशदान को वॉलेंटरी कर दिया है. इसका मतलब है कि 1,800 रुपए से अधिक का अंशदान करना अब अनिवार्य नहीं होगा. सोमवार को अधिसूचित नई ईपीएफ योजना के मुताबिक, किसी सदस्य के लिए देय अंशदान केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर नोटिफाइड सैलरी लिमिट के अधीन होगा. नोटिफिकेशन के मुताबिक, पैरा 9 के सब-पैराग्राफ (4) के प्रावधानों के तहत, यदि किसी मेंबर का मासिक वेतन निर्धारित वेतन सीमा से अधिक है तो नियोक्ता और कर्मचारी दोनों का कंट्रीब्यूशन केवल सैलरी लिमिट के आधार पर देय अंशदान तक ही सीमित रहेगा.

नोटिफिकेशन में दी गई ये जानकारी

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि जिन मामलों में कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के तहत हाई सैलरी पर कंट्रीब्यूशन की अनुमति दी गई है, उनमें नियोक्ता वेतन सीमा से अधिक हिस्से पर भी पेंशन फंड में योगदान कर सकता है. हालांकि, योजना के तहत इंप्लॉयर का कंट्रीब्यूशन संबंधित कर्मचारी के वेतन का 12 प्रतिशत होगा और कर्मचारी का अंशदान भी नियोक्ता के बराबर ही रहेगा. वर्तमान में 15,000 रुपए की वेतन सीमा पर 12 प्रतिशत की दर से अंशदान किया जाता है, जो अधिकतम 1,800 रुपए होता है. नई व्यवस्था के तहत इस सीमा से ऊपर का अंशदान कर्मचारी और नियोक्ता की इच्छा पर निर्भर करेगा. इसके पहले, कर्मचारी भविष्य निधि योजना 1952 के तहत कर्मचारी एक बार योजना में शामिल होने के बाद अपने वास्तविक मूल वेतन पर अंशदान करते थे और नियोक्ता भी उतनी ही राशि जमा करता था, भले ही वह वेतन निर्धारित सीमा से अधिक हो.

इंप्लॉई और इंप्लॉयर के पास विकल्प

वर्ष 2014 में संशोधन के बाद कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में नियोक्ता का 8.33 प्रतिशत योगदान 15,000 रुपए की वेतन सीमा (यानी अधिकतम 1,250 रुपये प्रति माह) तक सीमित कर दिया गया था, जबकि उससे अधिक राशि ईपीएफ खाते में चली जाती थी. नई ईपीएफ योजना में यह प्रावधान भी है कि जिन मामलों में कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के तहत उच्च वेतन पर योगदान की अनुमति है, उनमें नियोक्ता वेतन सीमा से अधिक राशि पेंशन फंड में जमा कर सकता है. इस बदलाव के बाद कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के पास यह विकल्प होगा कि वे वेतन सीमा तक ही अंशदान करें या वास्तविक अधिक वेतन पर स्वेच्छा से अधिक योगदान करें. हालांकि, भविष्य निधि अंशदान में इस बदलाव पर श्रम मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई टिप्पणी नहीं आई है.

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