'कांग्रेस में गुटबाजी चुनावी हार की बड़ी वजह', पंजाब चुनाव से पहले दिग्गज नेता ने खोल दी अपनी पार्टी की पोल
पंजाब चुनाव से पहले जिस तरह से कांग्रेस में घमासान देखने को मिल रहा उसे लेकर अब पार्टी के भीतर से ही आवाज उठने लगी है। पूर्व सांसद उदित राज ने इस मुद्दे को लेकर एक्स पर बड़ा पोस्ट लिया है। उत्तराखंड का जिक्र कर उन्होंने पार्टी नेताओं से खास अपील कर दी है।

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद डॉ. उदित राज ने पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को कई राज्यों में सत्ता इसलिए नहीं मिल पाई क्योंकि नेताओं ने संगठन को मजबूत करने के बजाय आपसी खींचतान में ज्यादा ऊर्जा लगाई। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में हम जीतते-जीतते रह गए। सरकार सजी हुई थाली की तरह हमारे सामने थी, लेकिन आपसी गुटबाजी के कारण हम हार गए। पिछले चुनाव में पंजाब में भी ठीक यही स्थिति बनी थी। वहां सरकार हमारी बन रही थी, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष सहित कुछ लोगों ने सबसे पहले मोर्चेबंदी शुरू कर दी।
कांग्रेस नेता उदित राज ने तोड़ी चुप्पी
पूर्व सांसद उदित राज ने आगे कहा कि इस गुटबाजी से न सिर्फ पार्टी को नुकसान हो रहा है, बल्कि पूरे देश को भी नुकसान पहुंच रहा है। हम सरकारें बनाने में असफल हो रहे हैं, लगातार हार रहे हैं और संगठन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
'गुटबाजी करते रहे तो कुछ नहीं मिलेगा'
कांग्रे नेता ने कहा कि ऐसी स्थिति में अगर हम गुटबाजी करते रहे तो किसी को कुछ नहीं मिलेगा। जब कुछ मिलेगा तभी बंटेगा, तभी तो फायदे में रहेंगे, मंत्री और मुख्यमंत्री बनेंगे। इसलिए गुटबाजी छोड़कर एकजुट होकर काम करने का समय है। इससे पहले, उदित राज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर भी एक पोस्ट किया है।
उत्तराखंड का जिक्र कर उदित राज की नसीहत
कांग्रेस नेता ने लिखा कि कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी न केवल चुनाव हारने का एक बड़ा कारण है, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर पार्टी के कमजोर होने की भी प्रमुख वजह है। समझ में नहीं आता कि आपसी लड़ाई से किसी को कुछ भी नहीं मिलने वाला है। गुटबाजी के कारण कांग्रेस उत्तराखंड में सरकार बनाने से असफल हो गई। पंजाब के नेताओं और कार्यकर्ताओं को इससे सीख लेनी चाहिए।
'हमें गुटबाजी से बचना होगा'
उदित राज ने आगे कहा कि स्वयं पंजाब भी पिछली विधानसभा चुनाव के समय भीषण गुटबाजी का शिकार हुआ। पार्टी के अध्यक्ष ने मानो सुपारी ले रखी थी कि अपनी ही सरकार के हर निर्णय का विरोध करना है और परिणाम था हम हारे। उन्होंने पोस्ट में आगे कहा कि यदि हम संविधान बचाने के संघर्ष तथा राहुल गांधी जी के त्याग और समर्पण को सामने रखकर देखें, तो हमें गुटबाजी से बचना होगा। संगठन में यदि कोई समस्या या मतभेद हो, तो उसे पार्टी के उचित मंच पर रखना चाहिए।
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