अयोध्या में चढ़ावा चोरी के मामले में 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज, अनुकल्प-लवकुश गिरफ्तार..श्रद्धालुओं में आक्रोश!
राम मंदिर दान चोरी मामले में एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बाद पहला बड़ा एक्शन हुआ है. राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य की शिकायत पर टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है. 8 लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में कोई बड़ा नाम नहीं है. अब सबकी नजरें पुलिस की आगे की जांच और एक्शन पर टिकी हैं.

राम मंदिर दान चोरी मामले में पहला बड़ा एक्शन हुआ है. राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर अयोध्या थाने में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव व अन्य के खिलाफ बीएनएस की धारा 306, 316 (5) और 317 (4), 61 और 3(5) में एफआईआर दर्ज हुई है. इसके साथ ही पुलिस ने सभी आरोपियों के घर छापेमारी की और सभी को हिरासत में ले लिया है. इसमें अनुकल्प और लवकुश को गिरफ्तार भी कर लिया गया है. 8 लोगों के खिलाफ दर्ज इस एफआईआर में चंपत राय या अनिल मिश्रा जैसा कोई बड़ा नाम नहीं है. इसमें 6 कैशियर हैं. ये एक्शन एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बाद हुआ है. सूत्रों के अनुसार, CCTV में चोरी करते दिखे और उनकी मदद करने वालों के खिलाफ एफआईआर हुई है.
किस धारा में कितनी सजा?
• 316(5): आपराधिक न्यासभंग (Criminal Breach of Trust) का गंभीर मामला. आमतौर पर बैंक, एजेंट, कर्मचारी, व्यापारी या किसी भरोसे के तहत दी गई संपत्ति/धन का गबन या दुरुपयोग. आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की जेल और जुर्माना.
• 317(4): चोरी की संपत्ति आदतन (Habitually) खरीदना, रखना या उसका कारोबार करना, जबकि पता हो कि वह चोरी की है. आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की जेल और जुर्माना.
• 317(5): चोरी की संपत्ति को छिपाने, बेचने, ठिकाने लगाने या नष्ट करने में मदद करना. जबकि पता हो कि वह चोरी की है. 3 वर्ष तक की जेल या जुर्माना या दोनों.
• 61: आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy). दो या अधिक लोगों का किसी अवैध काम या अपराध को मिलकर करने का समझौता.
• 3(5): समान उद्देश्य से कई लोगों द्वारा मिलकर अपराध करना. यदि अपराध समूह में किया गया है तो सभी की जिम्मेदारी तय की जा सकती है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी बाहरी शिकायत के बजाय खुद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आगे आकर इस मामले में अपनी तरफ से एफआईआर लिखवाई है. ट्रस्ट के इस कड़े कदम के बाद अब यह पूरा मामला एक औपचारिक आपराधिक जांच की दिशा में आगे बढ़ गया है, जिससे आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है.
आंतरिक गड़बड़ी नहीं, करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सवाल
इस मामले में अब तक केवल आंतरिक गड़बड़ी और विभागीय जांच के स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही थी. हालांकि, एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरी कानूनी तस्वीर बदल चुकी है. चूंकि यह मामला सिर्फ पैसे के हेर-फेर का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर रामलला के चरणों में अर्पित किए गए चढ़ावे और देश-दुनिया के करोड़ों हिंदुओं की आस्था व भरोसे से जुड़ा है. इसलिए ट्रस्ट ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है.
अब तक इस मामले की जांच केवल एसआईटी के प्रशासनिक दायरे में चल रही थी लेकिन क्रिमिनल केस दर्ज होने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों को आरोपियों को हिरासत में लेने, कड़ी पूछताछ करने और उनके बैंक खातों व संपत्तियों को खंगालने का सीधा कानूनी अधिकार मिल गया है.
लगातार सामने आ रहे थे सबूत और दस्तावेज
पिछले कुछ दिनों से राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में लगातार नए-नए आरोप लग रहे थे. इससे जुड़े कई चौंकाने वाले दस्तावेज और सबूत भी सामने आ रहे थे. उठ रहे तीखे सवालों के बीच ट्रस्ट ने अब खुद ही एफआईआर दर्ज कराकर यह साफ संदेश दे दिया है कि रामलला के खजाने और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एफआईआर के बाद जांच की आंच किन-किन बड़े चेहरों तक पहुंचेगी? क्या इसमें मंदिर प्रशासन से जुड़े कुछ अंदरूनी लोग भी शामिल हैं? एसआईटी और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद जल्द ही इस बड़ी साजिश का पर्दाफाश होने की उम्मीद है.
विश्व हिंदू परिषद आक्रामक और आक्रोशित
उधर, विश्व हिंदू परिषद इस मुद्दे पर आक्रामक और आक्रोशित है. अयोध्या में आज VHP की बड़ी बैठक हुई. विश्व हिंदू परिषद के 5 बड़े सदस्य बैठक में मौजूद रहे.सूत्रों के अनुसार, बैठक में बड़े फैसलों पर मंथन हुआ. आगे की रणनीति पर चर्चा हुई. TV9 पर VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि चोरी करने वालों को जेल भेजना चाहिए.
VHP की चार बड़ी मांग
• पहली मांग यही है कि कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए तुरंत FIR दर्ज की जाए, जो कि हो गई है.
• दूसरी मांग है कि मंदिर से जुड़े सभी मामलों की तेजी से जांच हो, सच सामने आए.
• तीसरी मांग ये है कि चढ़ावा चोरी से जुड़े मामलों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चले.
• चौथी मांग है कि दोषियों को कड़ी सजा मिले.
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