साइबर क्राइम का नया हब बन रहा लखनऊ, पॉश अपार्टमेंट में किराए पर ऑफिस लेकर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर
लखनऊ के पॉश इलाकों के 'कंक्रीट के जगलों' में बैठकर साइबर क्रिमिनल्स शहर को साइबर क्राइम का नया गढ़ बनाने में जुटे हैं। इन इलाकों में किराए पर आलीशान ऑफिस और फ्लैट्स लेकर फर्जी कॉल सेंटर चलाए जा रहे हैं।

लखनऊ: एक दौर था जब झारखंड के जामताड़ा के जंगलों में बैठकर साइबर जालसाज पूरे देश को ठगने का खेल खेलते थे। अब साइबर अपराध का तरीका और ठिकाना दोनों बदल चुका है। लखनऊ के पॉश इलाकों, ऊंची इमारतों और हाई-प्रोफाइल सोसायटियों के 'कंक्रीट के जगलों' में बैठकर साइबर क्रिमिनल्स लखनऊ को साइबर क्राइम का नया गढ़ बनाने में जुटे हैं।
पॉश इलाकों में किराए पर आलीशान ऑफिस और फ्लैट्स लेकर फर्जी कॉल सेंटर चलाए जा रहे हैं, जहां से लोगों को निशाना बनाकर अरबों की ठगी की जा रही है। हाल ही में पुलिस की ओर से किए गए खुलासे इस कड़वे सच की महज एक नजीर है।
समिट बिल्डिंग से 250 करोड़ का इंटरनेशनल फ्रॉड
विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग के 11वें तल पर चल रहे 'सोलारिस सॉल्यूसन' नाम के फर्जी कॉल सेंटर पर पुलिस ने छापेमारी कर ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार समेत 119 लोगों को गिरफ्तार किया। गिरोह के सरगना विनीत धर्मेंद्र वशिष्ठ, उसकी गर्लफ्रेंड रिंकी दास गुप्ता और नायकर जयराज को कोलकाता से दबोचा गया। इस गिरोह ने अमेरिकी नागरिकों को डरा-धमकाकर 250 करोड़ से अधिक की चपत लगाई। इस मामले में पुलिस पर भी मिलीभगत के आरोप लगे थे।
ओमैक्स R-2 अपार्टमेंट से गिरोह संचालित
अर्जुनगंज स्थित ओमैक्स R-2 अपार्टमेंट के एक फ्लैट में छापेमारी कर पुलिस ने 7 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। इनमें गुजरात निवासी मुख्य आरोपित पुनीत वर्मा और दीपेन पटेल के अलावा कोलकाता के मौ. सोहेल, मो. शाहनवाज, मो. इमरान, मौ. रियाज और सज्जाद हुसैन शामिल थे। यह गिरोह भी विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों की ठगी कर रहा था।
'साइबर हाइट्स' में फर्जी एप्पल कस्टमर केयर
विभूतिखंड के 'साइबर हाइट्स' बिल्डिंग के चौथे माले पर फर्जी कॉल सेंटर चला रहे मास्टरमाइंड प्रतापगढ़ निवासी सूरज त्रिपाठी, विवेक पांडेय, राहुल त्रिपाठी और महाराष्ट्र के आकाश वरुण को गिरफ्तार किया गया। यह गिरोह फर्जी एप्पल कस्टमर सपोर्ट वेबसाइट और VOIP कॉलिंग के जरिए अमेरिकियों को ठगता था। मौके से 18.50 लाख नकद और 31 लैपटॉप बरामद हुए।
बिना वेरिफिकेशन किराए पर मकान-ऑफिस बने 'संजीवनी'
जांच में सामने आया कि जिन सोसायटियों, कमर्शल बिल्डिगों और फ्लैटों में फर्जी कॉल सेंटर चल रहे थे, उनका पुलिस वेरिफिकेशन कराया ही नहीं गया था। मकान मालिकों और बिल्डिंग प्रबंधन की यही लापरवाही साइबर क्रिमिनल्स के लिए संजीवनी का काम कर रही है। सरगना अपने कॉलिंग स्टाफ को भी पॉश इलाकों के फ्लैटों में बिना किसी वेरिफिकेशन के ठहराते हैं।
हवाला से लेनदेन, क्रिप्टो में बदले जा रहे रुपये
पुलिस पड़ताल में खुलासा हुआ कि फर्जी कॉल सेंटरों से कमाए गए साइबर फ्रॉड के करोड़ों रुपयों का देश और शहर में लेनदेन हवाला नेटवर्क के जरिए हो रहा है। इसके अलावा शहर में सक्रिय 'म्यूल खाता' प्रदाता ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर चीन, फिलीपींस और कंबोडिया में बैठे अपने 'सुपर बॉस' के डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर कर देते हैं।
गुजरात और महाराष्ट्र के सरगना हावी
हाल के छापों में पकड़े गए ठगों के तार देश के दर्जनों राज्यों से जुड़े है, लेकिन मुख्य सरगना और मास्टरमाइंड सबसे ज्यादा गुजरात और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। इसके अलावा उत्तराखंड, असम, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, नेपाल और यूपी (बस्ती, गोरखपुर, नथुरा, गौतमबुद्धनगर) के युवाओं को कॉलर के रूप में रखा गया था।
कम पढ़े-लिखे युवाओं से कॉलिंग
साइबर गिरोह के सरगना बेहद शातिर और पढ़े-लिखे होते हैं, लेकिन कॉलिंग के लिए 4वीं से 12वीं पास कम पढ़े-लिखे युवाओं को भर्ती करते हैं ताकि वे काम पर कोई सवाल न उठाएं। हालांकि, वीओआईपी, इंटरनेट सर्वर्स और कॉलिंग सेटअप संभालने के लिए बी.टेक (कप्यूटर साइंस) किए युवाओं को टेक्निकल सपोर्ट में रखा जाता है। ठगी के इस धंधे में शामिल 75% युवाओं की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच है।
सक्रिय हुए मुखबिर
शहर में पकड़े जा रहे साइबर फ्रॉड के फर्जी कॉल सेंटरों के बाद पुलिस अलर्ट पर है। पुलिस सोशल मीडिया और गोपनीय सूचनाओं के जरिए कॉल सेंटरों पर नजर रख रही है। पुलिस ने मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया है। उन्हें पॉश इलाकों में ज्यादा अलर्ट रहने को कहा गया है। इसके अलावा पुलिस ने आरडब्ल्यूए के लोगों को भी सक्रिय रहने के लिए कहा है। फ्लैट में कोई संदिग्ध गतिविधी दिखने पर सूचना देने के लिए कहा है।
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