UGC एक्ट, विजय सिन्हा, भड़के सवर्ण और प्रशांत किशोर की जीत.. जानिए BJP का 'गढ़' ढहने की 4 बड़ी वजहें
जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने बीजेपी की 'किला' बांकीपुर को ढहा दिया है। प्रशांत किशोर ने 19 हजार वोटों से ज्यादा से जीत दर्ज की है। पीके की जीत में चार कारणों ने भूमिका निभाई।

पटना: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज के प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज की है। बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी का गढ़ थी। यहां से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पांच पर विधायक रह चुके हैं। बीजेपी बांकीपुर में लगातार 30 साल से लगातार जीतती आ रही थी, लेकिन प्रशांत किशोर ने इस उपचुनाव में उतरकर बीजेपी के गढ़ को ढहा दिया। अब केवल औपचारिक ऐलान बाकी है। प्रशांत किशोर की बांकीपुर में जीत की वजह क्या-क्या रहीं, आइए जानते हैं...
नीट पेपर लीक का मुद्दा
बांकीपुर उपचुनाव से पहले देशभर में नीट पेपर लीक के विरोध में छात्र सड़कों पर उतरे। बिहार की राजधानी पटना में भी इस मुद्दे पर छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें कई छात्र-छात्राएं भी घायल हुए। इससे युवाओं में बीजेपी के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा था। प्रशांत किशोर ने इस मुद्दे को सड़क से लेकर अपनी सभाओं तक प्रमुखता से उठाया, जिससे युवा वोटर उनके साथ जुड़ गए। प्रशांत किशोर ने पत्रकारों से एक बार कहा भी था कि युवाओं में नीट पेपर लीक को लेकर बीजेपी सरकार के खिलाफ काफी गुस्सा है। इसका असर बांकीपुर, दतिया सहित जहां भी उपचुनाव हो रहा है, वहीं देखने को मिलेगा। बांकीपुर में पीके की जीत ने इसे साबित भी कर दिया।
तेजस्वी का पीके को 'गुप्त' समर्थन
बांकीपुर उपचुनाव के मतदान के बाद बीजेपी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए दावा किया था कि तेजस्वी यादव ने प्रशांत किशोर को 'गुप्त' समर्थन दिया था। तेजस्वी ने अपनी पार्टी का वोट जन सुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर के लिए ट्रांसफर करवाया।
बांकीपुर चुनाव के नतीजे अब बीजेपी के दावे को हकीकत बयां कर रहे हैं। बांकीपुर में शुरू से ही बीजेपी और PK के बीच टक्कर मानी जा रही थी। बाकांपुर चुनाव से ठीक दो दिन पहले तेजस्वी ने एंट्री की थी और रोड शो किया था। लेकिन इसके पहले प्रशांत किशोर ने अपने लिए कांग्रेस और तेजस्वी से समर्थन मांगा था। हालांकि उस समय पीके को कोई जवाब नहीं मिला था। माना जा रहा कि जब बांकीपुर में तेजस्वी ने रोड शो किया तो उन्हें जमीनी हकीकत पता चली और उन्होंने अपना 'गुप्त' समर्थन पीके को दे दिया। ताकि बीजेपी के खिलाफ वोटों का बंटवारा न हो। इस रणनीति ने भी बांकीपुर में गेम-चेंजर की भूमिका निभाई।
बीजेपी पर भारी पड़ा रविशंकर का 'कुत्ता-बिल्ली' बयान
चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी नेता की ओर से दिया गया विवादित 'कुत्ता-बिल्ली' वाला बयान पार्टी पर ही भारी पड़ गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि बांकीपुर से कुत्ता-बिल्ली भी लड़ा देंगे तो बीजेपी जीत जाएगी। जन सुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने रविशंकर प्रसाद से बयान को लपक लिया। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान इस बयान को बांकीपुर की जनता का अपमान बताया। प्रशांत किशोर की ये रणनीति काम कर कर गई। बांकीपुर के मतदाताओं ने इसे अपने आत्मसम्मान से जोड़ लिया। इस बयान से बांकीपुर में सीधा फायदा जन सुराज को मिला।
बांकीपुर में बीजेपी को ले डूबी सवर्ण वोटरों की नाराजगी
बांकीपुर को पारंपरिक रूप से बीजेपी का गढ़ और सवर्ण बहुल इलाका माना जाता है। हालांकि पिछले एक साल से बीजेपी ने कुछ ऐसे कदम उठाए, जिससे सवर्ण वोटर में नाराजगी हो गई। इस नाराजगी की शुरुआत लोकसभा चुनाव 2024 के समय से शुरू हुई। बक्सर सीट से केंद्रीय मंत्री रहे अश्विनी चौबे का पार्टी ने टिकट काट दिया था। तब चर्चा थी कि उन्हें एक साल बाद होने वाला बिहार विधानसभा चुनाव लड़ाया जाएगा। हालांकि विधानसभा चुनाव में भी अश्विनी चौबे को बीजेपी ने टिकट नहीं दिया। चर्चा है कि सम्राट चौधरी के कहने पर अश्विनी चौबे का टिकट काटा गया था। इससे ब्राह्मण समाज में बीजेपी को लेकर नाराजगी हो गई।अभी बीजेपी ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने में लगी थी भूमिहार वोटर को नाराज कर दिया। दरअसल नीतीश के बाद बिहार में बीजेपी का सीएम बनने की बात चल रही थी, तब एक नाम सबसे ज्यादा आगे था वो था विजय कुमार सिन्हा का। लेकिन पार्टी ने उन्हें साइड लाइन कर सम्राट चौधरी को सीएम बना दिया। इतना ही नहीं, उनका विभाग भी नई सरकार में बदल दिया गया। बीजेपी माने न माने लेकिन, इससे भूमिहार वोटरों में नाराजगी हो गई।
रही सही कसर यूजीसी के नए नियम ने पूरी कर दी। यूजीसी के नए नियम में भेदभाव की परिभाषा में केवल एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों को ही रखा गया है। भेदभाव की परिभाषा में सामान्य वर्ग को शामिल नहीं किया गया है। यूजीसी के नए नियम के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। केंद्र और बिहार में बीजेपी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बाद सर्वणों के बीच ये मैसेज जाने लगा कि अब बीजेपी सवर्णों की पार्टी नहीं रही।
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