राम मंदिर: 72 घंटे तक चढ़ावा चोरी की घटना को चंपत राय ने दबाए रखा, फिर भी जांच में कैसे मिली क्लीनचिट?
अयोध्या पुलिस की विवेचना रिपोर्ट के मुताबिक, चंपत राय को 4 जून को चढ़ावा चोरी का वीडियो मिल गया था. 8 जून को ट्रस्ट ने इसे अफवाह बताया. चार्जशीट में 8 आरोपी और चंपत राय गवाह हैं.

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर एक और बड़ा खुलासा अयोध्या पुलिस की विवेचना रिपोर्ट से हुआ है. पुलिस की विवेचना रिपोर्ट का पेज 47 एक अहम सवाल खड़ा करता है. रिपोर्ट में दर्ज चंपत राय के बयान के मुताबिक, उन्हें 4 जून 2026 को ही चढ़ावा चोरी की घटना की जानकारी मिल गई थी. उनके कर्मचारी आनंद कुमार चौधरी ने उन्हें 4 जून 2026 रात करीब 9:45 बजे व्हाट्सऐप पर एक वीडियो भेजा था. चंपत राय के बयान के मुताबिक, वीडियो में कुछ कर्मचारी चढ़ावे की रकम छिपाते दिखाई दे रहे थे. वीडियो में यह भी बताया गया था कि कुछ पैसे राम जन्मभूमि परिसर के बाथरूम में छिपाकर रखे गए हैं.रिपोर्ट के मुताबिक, आनंद चौधरी ने इस घटना में करीब 67 कर्मचारियों के शामिल होने की आशंका जताई थी. घटना के समय चंपत राय अयोध्या में नहीं थे और दिल्ली से अयोध्या आ रहे थे. रास्ते में उन्हें यह वीडियो व्हाट्सऐप पर मिला. जब 4 जून 2026 को ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय को राम जन्मभूमि में रामलला के दान के पैसे की चोरी की घटना संज्ञान में आ गई थी तो उन्होंने यह बात सबसे क्यों छुपाई और 8 जून को वीडियो जारी कर यह क्यों बताया कि चोरी की कोई घटना नहीं हुई है बैंक का ऑडिट चल रहा है और उसे दौरान पैसे की चोरी की बात अफवाह फैलाई गई ऐसा उन्होंने क्यों कहा?
वीडियो अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी दिखाया गया
पुलिस की विवेचना रिपोर्ट के अनुसार, चंपत राय ने यह वीडियो सेवक पुरम में लैपटॉप के जरिए डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी दिखाया. इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर परिसर के CCTV फुटेज की जांच की गई. रिपोर्ट में दर्ज घटनाक्रम के मुताबिक, 5 जून को अयोध्या पहुंचने के बाद चंपत राय ने अनिल मिश्रा, गोपाल राव और डॉ. नरेंद्र के साथ CCTV फुटेज देखे. इसके बाद मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज को खंगाला गया.
चार्जशीट में 8 आरोपी, चंपत राय बने गवाह
मामले में पुलिस ने 73,480 पन्नों की चार्जशीट फैजाबाद जिला कोर्ट में दाखिल की है. चार्जशीट में चढ़ावे की रकम की गिनती से जुड़े 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है. वहीं, चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बल्कि गवाह बनाया गया है. अब चंपत राय को लेकर सवाल उठ रहा है कि जब उन्हें 4 जून को ही घटना की जानकारी हो गई थी और उन्होंने वीडियो भी देखा था, तो जांच में उन्हें आरोपी क्यों नहीं बनाया गया. पुलिस के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में चोरी की 105 घटनाएं दर्ज हुईं, 173 गवाहों के बयान और 422 दस्तावेज भी चार्जशीट में शामिल किए गए हैं. चोरी की घटना सामने आने के 20 दिन बाद 25 जून को FIR दर्ज हुई थी.
8 जून को ट्रस्ट ने चोरी को बताया था अफवाह
पुलिस की विवेचना रिपोर्ट में दर्ज चंपत राय के बयान के मुताबिक, उन्हें 4 जून को कर्मचारी से वीडियो मिल गया था. इसके बाद वीडियो अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी दिखाया गया और CCTV फुटेज देखने की प्रक्रिया शुरू हुई. लेकिन 8 जून 2026 को ट्रस्ट की ओर से मीडिया को जारी वीडियो में कहा गया कि बैंक कर्मचारियों द्वारा ट्रस्ट का ऑडिट चल रहा है और इसी दौरान राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी होने की अफवाह फैलाई गई है. इसी मामले पर अब सवाल उठ रहा है कि जब 4 जून को ही चंपत राय को वीडियो के जरिए चढ़ावे की रकम छिपाने की जानकारी मिल गई थी, तो 8 जून को इसे अफवाह क्यों बताया गया?
67 कर्मचारियों की आशंका से शुरू हुई जांच, 8 लोगों पर कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद चढ़ावे की गिनती में शामिल कर्मचारियों की भूमिका की जांच की गई. शुरुआत में कर्मचारी आनंद चौधरी ने करीब 67 लोगों के शामिल होने की आशंका जताई थी. पुलिस की विवेचना के बाद चार्जशीट में 8 लोगों को आरोपी बनाया गया. जांच का दायरा सिर्फ पैसे गायब होने तक सीमित नहीं रहा. पुलिस ने यह भी पता लगाने की कोशिश की कि रकम को गणना स्थल से किस तरह बाहर ले जाया गया और बाद में उसका इस्तेमाल किस तरह हुआ.
चंपत राय को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया?
उपलब्ध विवेचना रिपोर्ट के आधार पर सबसे अहम बात यह है कि चंपत राय को आरोपी नहीं बनाया गया है. उन्हें गवाह के रूप में रखा गया है. इसी तरह डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव भी आरोपी नहीं बल्कि गवाह बनाए गए हैं. पुलिस जांच में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ आपराधिक संलिप्तता के सबूत नहीं मिले, इसलिए उन्हें आरोपी नहीं बल्कि गवाह बनाया गया है.
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