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यूपी चुनावः हर लोकसभा से एक, जीती सीटों पर अलग फॉर्मूला… SP से इतनी सीटें मांग रही कांग्रेस

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी चाहती है कि उत्तर प्रदेश की 80 संसदीय सीटों में से हर सीट से कम से कम 1 विधानसभा सीट उसके कोटे में आए, यही नहीं कुछ जगहों पर पार्टी 2-2 सीटों की भी मांग रखेगी.

Gaurav Dwivedi
September 4, 2026
3 min read
यूपी चुनावः हर लोकसभा से एक, जीती सीटों पर अलग फॉर्मूला… SP से इतनी सीटें मांग रही कांग्रेस

उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक बार फिर साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में लगे हैं. हालांकि दोनों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर मामला फंसा हुआ है.कहा जा रहा है कि सपा के साथ गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस ने अपना सीट शेयरिंग फॉर्मूला तैयार कर लिया है. इसके तहत कांग्रेस बातचीत की टेबल पर अखिलेश यादव के सामने 115 से 120 सीटों की मांग रखेगी.

टेबल पर किस फॉर्मूले के साथ बैठेगी कांग्रेस

प्रदेश में जर्जर संगठन और 2022 में अकेले चुनाल लड़कर महज 2 विधायक जीतने वाली कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से गठजोड़ करके 6 सीटें जीती तो अब पार्टी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में राज्यव्यापी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है. इसके लिए सबसे पहले संगठन सृजन अभियान के तहत जल्दी ही वो हर जिले में नए जिलाध्यक्ष के साथ-साथ संगठन की कील कांटे दुरुस्त करेगी.

फिर कांग्रेस अपने सीट शेयरिंग फॉर्मूले को लेकर सपा के साथ इस महीने की आखिर में बातचीत की टेबल पर आएगी. कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी चाहती है कि उत्तर प्रदेश की 80 संसदीय सीटों में से हर सीट से कम से कम 1 विधानसभा सीट उसके कोटे में आए, यही नहीं कुछ जगहों पर पार्टी 2-2 सीटों की भी मांग रखेगी.

अमेठी-रायबरेली जैसे गढ़ से 4-4 सीटों की डिमांड

साथ ही इनमें से उन 6 लोकसभा सीटों जहां से पार्टी के सांसद हैं, वहां कम से कम उसे 3 सीटें मिलें. इसके अलावा अमेठी और रायबरेली के साथ-साथ कुछ सीटों पर वो 4-4 सीटों की भी मांग करने की तैयारी कर रही है. इस तरह से कांग्रेस ने बातचीत की शुरुआत में 115-120 सीटें मांगने का मन बनाया है.

अखिलेश से अधिक सीटें मांगने के पीछे की वजह

यूपी में कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम का कहना है कि सम्मानजनक तरीके से सीटों को लेकर समझौता होगा. कांग्रेस का तर्क है कि, जब 2017 में सपा सत्ता में थी तो उसने 105 सीटें दी थीं. अब 2 बार से सत्ता से बाहर है तो दलितों और मुस्लिमों को साथ लाने में राहुल गांधी की भूमिका बढ़ी है. ऐसे में इस बार उसे कुछ सीटें बढ़ाकर मिलनी चाहिए. वैसे भी कांग्रेस जो भी सीटें जीतेगी गठबंधन के जरिए मुख्यमंत्री तो अखिलेश यादव ही बनेंगे.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है कि उत्तर प्रदेश में सीट को लेकर कोई फॉर्मूला नहीं है, यहां पर सिर्फ जीत ही फॉर्मूला होगा. साथ ही दोनों पक्षों से सीट शेयरिंग को लेकर अपने-अपने स्तर पर बयान भी दिए जा रहे हैं.

ऐसे में कुल मिलाकर यह साफ है कि, सपा कांग्रेस की हैसियत के लिहाज से उतनी सीटें देने को तैयार नहीं दिख रही है, जितने की वो चाहत रखती है. वहीं कांग्रेस बातचीत की शुरुआत ज्यादा से ज्यादा सीटों से करना चाहती है ताकि, उसे कम से कम 100 सीटों का कोटा हासिल हो जाए. अब चूंकि, दोनों दलों के पास मिलकर साथ लड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है तो सीट बंटवारे के आखिरी आंकड़े में कौन बाजी मारेगा ये खासा दिलचस्प होगा.

विशेष खबर प्रस्तुति- गौरव द्विवेदी(संपादक)खबर युग (Khabar Yug) हिंदी न्यूज़ और मीडिया पोर्टल

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