सिस्टम की नाकामी की वजह से जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन, RSS की समन्वय बैठक में कई मसलों पर मंथन
संघ की बैठक में नशाखोरी के बढ़ते चलन पर लंबी चर्चा हुई. बैठक में यह बात निकलकर आई कि इस दिशा में सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करने पर जोर दिया जाए.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंदा ने बताया कि अखिल भारतीय समन्वय बैठक में पेपर लीक, जनसंख्या संतुलन और देश में नशाखोरी के बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर चर्चा की गई. साथ AI का समाज पर पड़ रहे असर को लेकर मंथन किया गया. बैठक में यह बात सामने आई कि पेपर लीक मसले पर जंतर-मंतर पर युवाओं का प्रदर्शन सिस्टम की नाकामी की वजह से हुआ था.बैठक में देश में जनसंख्या संतुलन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. देश में ओल्ड एज रेट बढ़ रहा है, तो युवाओं में फर्टिलिटी रेट कम होता जा रहा है. इससे सामाजिक ताना-बाना यानी सामाजिक सद्भाव बिगड़ रहा है. इसमें सुधार को लेकर चर्चा की गई.
AI के बढ़ते प्रभाव और उसके असर पर भी मंथन
देश में नशाखोरी के बढ़ते चलन पर लंबी चर्चा हुई. बैठक में यह बात निकलकर आई कि इस दिशा में सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करने पर जोर दिया जाए. सरकार और सामाजिक संगठन दोनों ही अपने-अपने स्तर काम कर रहे हैं उसमें मिलकर और ताकत से काम करने की जरूरत पर मंथन हुई.
इसके अलावा AI का समाज पर तेजी से पड़ रहे प्रभाव को लेकर भी बातचीत हुई. AI के अच्छे और खराब दोनों पक्षों पर भी चर्चा हुई. इससे जुड़ी अच्छी चीजों के समाज में बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया गया.
परीक्षा सुधार की कोशिश पर जोर देना होगा
बैठक में सबसे अहम मुद्दा रहा पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन का. बैठक में यह बात निकलकर आई कि पेपर लीक की वजह से जंतर-मंतर पर युवाओं का प्रदर्शन सिस्टम की नाकामी की वजह से हुआ. नीट और अन्य परीक्षाओं में कमियों को दूर करने के साथ ही सिस्टम को दुरुस्त करने पर चर्चा और युवाओं तथा समाज के चिंता का निवारण देने पर जोर रहा. संघ का मानना है कि सिर्फ Disruption से काम नहीं बनेगा बल्कि सुधार की कोशिश पर जोर देना होगा.
भारत का भविष्य देश के युवाओं के हाथ में सुरक्षित है. संघ की शाखा में आने वाले 60 फीसदी युवा हैं. जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करने वाले युवाओं और संघ के शाखा में आने वाले युवाओं से भी अधिक देश में करीब 35 करोड़ युवाओं के साथ संवाद और इन्वॉल्व करने की जरूरत है.
सिस्टम को ठीक ढंग से चलाया जाना चाहिए. समाज को विश्वास में लेकर चलना चहिये. युवाओं के चिंता का भी ख्याल रखना चाहिए.नीट ही नहीं अन्य परीक्षाओं से जुड़ी कमियों को दूर करने को लेकर चर्चा हुई. Disruption से सिर्फ काम नहीं चलता उसमें सुधार को लेकर चर्चा भी होना चाहिए़.
ये सच है कि सिर्फ शाखा में आने वाले ही यूथ नहीं है और जो जंतर-मंतर पर गए वही सिर्फ यूथ नहीं है. देश में कुल 35 करोड़ युवा हैं. उनके साथ संवाद और चीजों में उनको इन्वॉल्व करना हमारी सोच है. भारत का भविष्य हमारे युवाओं के साथ सुरक्षित है. हम चाहते हैं कि सभी धार्मिक और अध्यात्मिक संगठनों को युवाओं को इन्वॉल्व करने में आगे बढ़ेंगे.
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