PM मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट 'भारतनेट' पर उठे सवाल, केबल बिछीं लेकिन लाखों गांवों तक अब तक नहीं पहुंचा इंटरनेट
देश के हर गांव तक तेज ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाने वाली केंद्र सरकार की 'भारतनेट' योजना में कई कमियां पाई गई हैं। संसद की आईटी स्टैंडिंग कमेटी की 32वीं रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में 7.19 लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल तो बिछा दी गई है, लेकिन 28 फरवरी 2026 तक देश की 2.64 लाख ग्राम पंचायतों में से केवल 78,899 पंचायतों में ही इंटरनेट का लोकल नेटवर्क पॉइंट (PoPs) वास्तव में काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' अभियान के तहत देश के हर गांव तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाने का सपना देखा गया और इसको सच करने के लिए ' भारतनेट ' (BharatNet) योजना की घोषणा की गई थी। लेकिन अब पीएम मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर सावल उठाए जा रहे हैं। संसद की एक कमेटी ने भारतनेट प्रोजेक्ट में कुछ कमियां बताईं। कमियों को बताते हुए कमेटी ने कहा है कि काम कहां अटका हुआ है, यह जानने और हर गांव तक इंटरनेट पहुंचाने के लिए प्रत्येक राज्य और काम करने वाली एजेंसियों की जांच की जानी चाहिए। कम्युनिकेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर बनी स्टैंडिंग कमिटी ने 'डिजिटल भारत निधि' पर अपनी 32वीं रिपोर्ट दी। इसमें कहा गया है कि 'भारतनेट' योजना के तहत इंटरनेट का ढांचा और लाइनें तो काफी बिछाई गई हैं, लेकिन वास्तव में जिन गांवों में इंटरनेट चालू और काम कर रहा है, उनकी संख्या तय किए गए लक्ष्य से काफी कम है। यानी योजना के तहते केबल को बिछ गई हैं, लेकिन जितने गांव तक इंटरनेट पहुंचना चाहिए था, अभी तक उतने गांव में इंटरनेट नहीं पंहुचा है।
केवल 78,899 गांव में है सुविधा
बता दें कि टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट की ओर से कमिटी को दी गई जानकारी के मुताबिक, 28 फरवरी, 2026 तक देश भर की लगभग 2.64 लाख ग्राम पंचायतों में से 78,899 ग्राम पंचायतों में भारतनेट के पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस (PoPs) काम कर रहे थे। दरअसल, PoP असल में एक लोकल नेटवर्क पॉइंट होता है, जहां से घरों, संस्थानों और दूसरे यूजर्स तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी बढ़ाई जा सकती है।
केबल बिछीं लेकिन इंटरनेट नहीं
समिति का कहना है कि भले ही काफी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है, लेकिन काम कर रही ग्राम पंचायतों (GPs) की संख्या तय किए गए यूनिवर्सल कवरेज से कम रही है और अलग-अलग राज्यों और मॉडलों में इसे लागू करने की रफ्तार एक जैसी नहीं है। इससे प्लानिंग, तालमेल और काम को अंजाम देने में कमियों का पता चलता है। कमेटी ने विभाग से कहा है कि वह 'भारतनेट' योजना की पूरी जांच करे कि किस राज्य और किस मॉडल में कितना काम हुआ है और काम में आ रही रुकावटों को पहचानकर उन्हें दूर करे। विभाग ने समिति को बताया कि 28 फरवरी, 2026 तक इस प्रोग्राम के तहत 7.19 लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी थी।
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