औरैया डबल मर्डर केस में बड़ा फैसला, पूर्व सपा MLC कमलेश पाठक समेत 10 को उम्रकैद
औरैया के चर्चित अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे डबल मर्डर केस में कोर्ट ने पूर्व सपा MLC कमलेश पाठक समेत 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. सभी पर 50-50 हजार का जुर्माना भी लगा है.

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के चर्चित अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे के डबल मर्डर केस में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पूर्व सपा MLC कमलेश पाठक समेत 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. करीब छह साल से चल रहे इस मामले में 72 गवाहों की गवाही और 900 से अधिक तारीखों के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया.
मंदिर की जमीन के विवाद में हुई थी हत्या
यह मामला 15 मार्च 2020 का है. पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. आरोप था कि मंदिर की जमीन को लेकर चल रहे विवाद के कारण इस वारदात को अंजाम दिया गया. मामले में पूर्व सपा MLC कमलेश पाठक, उनके परिवार के सदस्यों और साथियों को आरोपी बनाया गया था. घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था. पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की. इसके बाद यह मुकदमा लंबे समय तक अदालत में चलता रहा.
900 से ज्यादा तारीखों के बाद आया फैसला
इस मामले की सुनवाई करीब छह साल पांच महीने तक चली. इस दौरान अदालत में 900 से ज्यादा तारीखें पड़ीं. अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के साथ 72 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
फैसले के दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे, ताकि फैसला सुनाए जाने के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति न हो.
पूर्व सपा MLC को आगरा जेल में रखा गया
मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व सपा MLC कमलेश पाठक को वर्तमान में आगरा जेल में रखा गया है. अदालत के फैसले के बाद अब उन्हें भी उम्रकैद की सजा भुगतनी होगी. अन्य दोषियों के खिलाफ भी अदालत के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.
वादी पक्ष ने कहा- आज न्याय की जीत हुई
अदालत के फैसले के बाद वादी पक्ष के अधिवक्ता सौरभ पाठक ने इसे न्याय की जीत बताया. उन्होंने कहा कि मृतक अधिवक्ता मंजुल चौबे उनके साथ वकालत करते थे. ऐसे में इस मामले से उनका व्यक्तिगत जुड़ाव भी रहा है. सौरभ पाठक ने कहा कि करीब 900 पेशियों और 72 गवाहों की गवाही के बाद लगभग साढ़े छह साल में अदालत का फैसला आया है. उन्होंने कहा कि 10 दोषियों को सजा मिलने से वादी पक्ष को न्याय मिला है.
फैसले के बाद वादी पक्ष में खुशी
अदालत का फैसला आने के बाद वादी पक्ष के लोगों में खुशी देखने को मिली. उन्होंने अदालत के साथ अधिवक्ताओं, पुलिस और पुलिस प्रशासन का आभार जताया. वादी पक्ष की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी धन्यवाद दिया गया. फैसले को देखते हुए कोर्ट परिसर में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई थी. पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए रखी. लंबे समय से चल रहे इस चर्चित डबल मर्डर केस में अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है.
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