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केंद्रीय कैबिनेट का होगा विस्तार, विधानसभा चुनाव से पहले क्या बढ़ेंगे यूपी के किरदार?

केंद्र की एनडीए सरकार का विस्तार होने की चर्चा चल रही है। यदि यह हाता है तो उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्रीय मंत्रिमंडल में यूपी की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। बीजेपी इसमें क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है।

Gaurav Dwivedi
September 5, 2026
3 min read
केंद्रीय कैबिनेट का होगा विस्तार, विधानसभा चुनाव से पहले क्या बढ़ेंगे यूपी के किरदार?

लखनऊ: केंद्रीय कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में यूपी के एनडीए (NDA) के नेता भी उम्मीद लगाए बैठे हैं। वजह यह कि यहां 2027 के शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे देखते हुए यूपी की हिस्सेदारी कुछ बढ़ सकती है। चुनावी नजरिए से जातीय और क्षेत्रीय संतुलन भी बनाने की कोशिश होगी। ऐसे में कई सवाल हैं। क्या मंत्रिमंडल में यूपी की हिस्सेदारी कितनी बढ़ सकती है? क्या पुरानों को हटाकर कुछ बदलाव भी किए जाएंगे?

अभी ये हैं यूपी के चेहरे

केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित यूपी से 11 मंत्री हैं। लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री हैं। वहीं यूपी से राज्यसभा पहुंचे हरदीप पुरी के पास पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का जिम्मा है। आरएलडी के जयंत चौधरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। वहीं राज्य मंत्रियों में जितिन प्रसाद, पंकज चौधरी, अनुप्रिया पटेल, एसपी सिंह बघेल, बीएल वर्मा, कीर्तिवर्द्धन सिंह, कमलेश पासवान शामिल हैं।

उम्मीद की वजह

अक्सर यह देखा गया है कि जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक होते हैं, वहां की केंद्रीय कैबिनेट में हिस्सेदारी बढ़ जाती है। विधानसभा चुनाव 2022 से पहले जब 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था, तब भी हिस्सेदारी बढ़ी थी। केंद्र में 2019 में यूपी से प्रधानमंत्री समेत 10 मंत्री बनाए गए थे। इनमें से संतोष गंगवार का इस्तीफा हो गया था। उसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार हुआ तो सात नए मंत्री बनाए गए थे और संख्या 16 हो गई थी। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी यूपी की हिस्सेदारी पिछली बार की तरह भले न बढ़े लेकिन 2027 से पहले जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने के लिए कुछ बदलाव तो होंगे।

ये जा सकते हैं सेंटर में

पार्टी में जो चर्चाएं हैं कि ऐसे बड़े नेता जिन्हें भाजपा की केंद्रीय कार्यकारिणी में जगह नहीं मिली और लोकसभा या राज्यसभा सदस्य हैं, उनको मौका मिल सकता है। ऐसे में ब्राह्मण नेताओं को देखा जाए तो पश्चिमी यूपी से लक्ष्मीकांत वाजपेयी या मध्य यूपी से डॉ दिनेश शर्मा को जगह मिल सकती है। इससे ब्राह्मणों को साधने की कोशिश की जा सकती है। पश्चिमी यूपी से दलित नेता के तौर पर हाथरस सुरक्षित सीट से सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि के नाम की चर्चा है। वहीं रुहेलखंड में संतोष गंगवार लंबे समय तक ओबीसी वोटरों को साधते रहे। अब उस जगह को भरने के लिए बरेली से सांसद छत्रपाल सिंह को जगह दी जा सकती है। इन दोनों नेताओं को बतौर राज्यमंत्री शामिल किया जा सकता है। पूर्वांचल में पंकज चौधरी राज्यमंत्री हैं। चर्चा ये है कि ओबीसी वोटरों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश अध्यक्ष बनने के बावजूद उनकी मंत्रिमंडल में जगह बरकरार भी रखी जा सकती है। यदि उनसे मंत्रिमंडल लिया जाता है तो उसी वर्ग के किसी को शामिल किया जा सकता है। पूर्वांचल की आरपीएन सिंह राज्यसभा सदस्य हैं। उनको भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

विशेष खबर प्रस्तुति- गौरव द्विवेदी(संपादक)खबर युग (Khabar Yug) हिंदी न्यूज़ और मीडिया पोर्टल

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