यूपी के वे 7 शिक्षक; जिन्होंने राजनीतिक मैदान में भी किया कमाल, मायावती से राजनाथ सिंह तक की स्टोरी जानिए
किसी भी छात्र के जीवन में शिक्षक का स्थान ईश्वर से भी ऊपर होता है। मायावती से लेकर राजनाथ सिंह तक ने क्लासरूम से निकलकर प्रदेश की सत्ता के शीर्ष तक का सफर तय किया।

लखनऊ: शिक्षकों के बारे में कहा जाता है कि वह समाज को नई दिशा देने वाले होते हैं। नई पीढ़ी को जीवन मूल्यों के बारे में परिचित कराकर वह समाज, प्रदेश, देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान देता है। नई पीढ़ी को राह दिखाने वाले शिक्षक समाज में अपना योगदान देने के साथ-साथ नीति निर्धारक भी बनते रहे हैं। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के राजनीतिक मैदान में उतरने की बात लगातार आती रही है। ऐसे कई शिक्षक रहे हैं, जिन्होंने राजनीतिक मैदान में भी बड़ी सफलता हासिल की। शिक्षक दिवस के अवसर पर हम उत्तर प्रदेश के उन सात शिक्षकों की चर्चा करेंगे, जिन्होंने शिक्षण का क्षेत्र छोड़कर राजनीति में कदम रखा। कामयाबी के झंडे गाड़े। इसमें सबसे बड़ा नाम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से लेकर मायावती तक का है, शिक्षण कार्य से अलग हटकर उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना। देश एवं समाज को नई दिशा देने में बड़ी भूमिका निभाई।
1. राजनाथ सिंह
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भाभोरा गांव में हुआ था। साधारण किसान परिवार में जन्मे राजनाथ सिंह ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी से फिजिक्स की पढ़ाई। बाद में वे मिर्जापुर के केबी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में भौतिक विज्ञान के लेक्चरर बने। आरएसएस और एबीवीपी से उनका छात्र जीवन में जुड़ाव रहा। बाद में वे भारतीय जनसंघ मिर्जापुर इकाई के अध्यक्ष बने। 1991 में यूपी में बनी भाजपा की पहली सरकार में वे शिक्षा मंत्री बने। वर्ष 2000 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 2014 में बनी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में वे गृहमंत्री बनाए गए। 2019 से वे रक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल रहे हैं। वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं।
2. मायावती
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती का जन्म नई दिल्ली में हुआ था। उनके पिता गौतमबुद्ध नगर में डाकघर कर्मी थे। मायावती के छह भाई और दो बहनें हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कालिंदी कॉलेज आर्ट्स ग्रैजुएट थे। उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से बीएड और दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई की। राजनीति में आने से पहले दिल्ली के एक स्कूल में शिक्षण कार्य करती थी। बाद में कांशीराम के प्रभाव में आकर बसपा में शामिल हुई। 3 जून 1995 को पहली बार यूपी की मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला। वह चार बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं।
3. डॉ. दिनेश शर्मा
डॉ. दिनेश शर्मा ने छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत की। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के संपर्क में आने के बाद उनकी प्रतिभा सामने आई। आरएसएस और एबीवीपी से जुड़ने के बाद उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। 1992 में उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी के कॉमर्स विभाग में प्रोफेसर बने। 2006 में वे लखनऊ नगर निगम के मेयर चुने गए। वर्ष 2012 में भी उन्होंने इस पद पर कब्जा जमाया। यूपी में 2017 में बनी योगी सरकार के पहले कार्यकाल में उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया। वर्ष 2023 से वे राज्यसभा सांसद हैं।
4. प्रो. एसपी सिंह बघेल
आगरा से भाजपा सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल का जन्म औरैया में हुआ था। उन्होंने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ से एमएससी, लॉ और पीएचडी की शिक्षा हासिल की। राजनीति में आने से पहले आगरा कॉलेज में लेक्चरर रहे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दरोगा के तौर पर की थी। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी और मुलायम सिंह यादव की सुरक्षा में तैनात रहने के दौरान राजनीति के करीब आए। 1998 में पहली बार सपा के टिकट पर जलेसर लोकसभा सीट से सांसद बने। बाद में वे बसपा में चले गए। वर्ष 2010 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया। 2014 में बसपा छोड़कर वे भाजपा में शामिल हुए। वे पिछड़ा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। वे यूपी सरकार में भी मंत्री रहे थे।
5. डॉ. रमेश चंद तोमर
डॉ. रमेश चंद तोमर पश्चिमी तोमर के कद्दावर नेताओं में से एक हैं। राजनीति में आने से पहले वे गाजियाबाद के प्रसिद्ध एमएमएच कॉलेज में इतिहास (History) के प्रोफेसर थे। भाजपा के टिकट पर डॉ. रमेशचंद तोमर पहली बार वर्ष 1991 में हापुड़ लोकसभा सीट से जीते थे। इसके बाद वह भाजपा के टिकट पर लगातार वर्ष 1996, वर्ष 1998 और 1999 का चुनाव भी जीत दर्ज की। 2004 में हार के बाद 2009 में भाजपा ने उनका टिकट काटा। इसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हो गए। बाद में भाजपा में वापसी की। शिक्षक से राजनीति में एक मुकाम बनाने में सफल रहे।
6. प्रो. रीता बहुगुणा जोशी
पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुण की पुत्री प्रो. रीता बहुगुणा जोशी को राजनीति विरासत में मिली थी। उनका जन्म प्रयागराज में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एमए और पीएचडी की पढ़ाई की। इतिहास विषय में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद वे यूनिवर्सिटी में शिक्षण कार्य भी किया। वे लंबे समय तक कांग्रेस में राजनीति की। वर्ष 2007 से 2012 तक यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं। उन्होंने 1995 से 200 तक इलाहाबाद के मेयर का भी पद संभाला था। वर्ष 2016 में वे भाजपा में शामिल हो गईं। लखनऊ कैंट से विधायक बनी प्रो. जोशी को योगी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री बनाया गया। 2019 में भाजपा ने उन्हें प्रयागराज सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने अपने पिता हेमवती नंदन बहुगुणा के जीवन पर किताब भी लिखी है।
7. सतीश चंद्र द्विवेदी
सतीश चंद्र द्विवेदी का जन्म सिद्धार्थनगर के शनिचरा गांव में हुआ था। उन्होंने छात्र जीवन में एबीवीपी से राजनीतिक करियर की शुरुआत की। 2007 में उन्हें भाजपा के गोरखपुर क्षेत्र के प्रशिक्षण विभाग की जिम्मेदारी मिली। राजनीति के साथ-साथ उनका जुड़ाव शिक्षण क्षेत्र से भी रहा। उन्होंने गोरखपुर यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद से करियर की शुरुआत की। बाद में बुद्ध पीजी कॉलेज, कुशीनगर में असिस्टेंट प्रोफेसर बने। बाद में वे सिद्धार्थनगर के खेसरहा ब्लॉक में डिग्री कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर बनाए गए। वर्ष 2017 में भाजपा ने उन्हें इटावा से चुनावी मैदान में उतारा। वे जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। उन्हें योगी सरकार के पहले कार्यकाल में शिक्षा मंत्री बनाया गया था।
विशेष खबर प्रस्तुति- गौरव द्विवेदी(संपादक)खबर युग (Khabar Yug) हिंदी न्यूज़ और मीडिया पोर्टल
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