बाबा नीब करौरी महाराज के पैतृक मकान पर कब्जे का विवाद, 6 पोतियों ने कहा- DM ने नहीं सुनी तो जाएंगे कोर्ट
अकबरपुरा में संत नीब करौरी बाबा के पैतृक निवास के अधिकार के लिए उनकी 6 पोतियों ने हर कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। डीएम से की गई शिकायत के बाद यदि फैसला उनके पक्ष में नहीं आया तो वे कोर्ट में जाएंगी।

फिरोजाबाद: दुनिया भर में विख्यात संत बाबा नीब करौरी महाराज के पैतृक मकान को लेकर विवाद अदालत में पहुंच सकता है। बाबा नीब करौरी का जन्मस्थान टूंडला के अकबरपुर में है। यह उनका पैतृक घर है जिसके अधिकार को लेकर अब कानूनी लड़ाई शुरू हो सकती है। उनकी पोतियों ने आरोप लगाया है कि बाबा के पैतृक मकान पर श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट ने जबरन कब्जा कर रखा है। इस बारे में जिलाधिकारी को शिकायत की गई है। यदि प्रशासन मकान से जल्द ही ट्रस्ट का कब्जा खत्म नहीं कराता तो बाबा की पोतियां अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी।
बाबा की मुंबई निवासी पोती भावना रावत के पति मनोज रावत ने साफ कहा है कि यदि जिला प्रशासन से उन्हें जल्द न्याय नहीं मिला तो वे इस मामले को अदालत में ले जाएंगे। यानी बाबा के वंशज बाबा के जन्मस्थान को ट्रस्ट के कब्जे से मुक्त कराने के लिए हर कानूनी रास्ता अपनाने के लिए तैयार हैं।
संपत्ति को लेकर ट्रस्ट और बाबा के परिवार में विवाद
बाबा नीब करौरी के छोटे बेटे दिवंगत धर्मनारायण शर्मा की छह बेटियों, यानी बाबा नीब करौरी की पोतियों ने जिला प्रशासन से शिकायत की है कि ट्रस्ट ने बाबा के जन्मस्थान पर परिवार की सहमति के बिना कब्जा कर रखा है। उन्होंने उस घर को ट्रस्ट के कब्जे से मुक्त कराकर उसे बाबा के परिवार को सौंपने की मांग की है। उनका कहना है कि मकान, मंदिर और डाक बंगलिया की संपत्ति श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट को दान नहीं की गई थी। इसके बावजूद ट्रस्ट ने इस संपत्ति पर कब्जा कर रखा है।
बाबा की संपत्ति के दस्तावेजों की जांच कराने की मांग
बाबा की पोतियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाए और जब तक स्थिति साफ न हो, तब तक ट्रस्ट का संचालन प्रशासन की निगरानी में हो। इस शिकायत के बाद जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने इस मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में यह पता किया जाएगा कि विवादित संपत्ति की वास्तविक स्थिति क्या है। इसके स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच से यह पता किया जाएगा कि क्या वास्तव में यह संपत्ति विधिवत ट्रस्ट को दी गई थी, या संपत्ति पर ट्रस्ट ने बिना किसी वैध प्रक्रिया के कब्जा कर लिया था।
ट्रस्ट ने आरोप खारिज किए
श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने बाबा की संपत्ति पर कब्जा करने के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि बाबा का मकान, मंदिर और डाक बंगलिया ट्रस्ट को दान में दिया गया था। यदि यह संपत्ति ट्रस्ट को नहीं दी गई होती तो इतने बरसों से ट्रस्ट इसकी देखरेख क्यों करता।
नगला में है बाबा का जन्मस्थान
अकबरपुर की ग्राम पंचायत नगला संत नीब करौरी बाबा की जन्मस्थली है। बाबा 20वीं सदी के प्रख्यात संत थे। यहां का मकान नंबर 154 वह स्थान है जहां बाबा नीब करौरी का जन्म हुआ था। उनका जन्म कब हुआ था, इसकी कहीं कोई जानकारी नहीं है। वे अपने इसी पैतृक आवास में रहते थे। इस घर में बाबा का एक ध्यान कक्ष, रसोई, अतिथि कक्ष और शयन कक्ष है। इस मकान पर श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट का कब्जा है।
बाबा का मूल नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा
दिवंगत संत बाबा नीब करौरी महाराज का मूल नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा है। बाबा के जन्मस्थान वाले पैतृक मकान को श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट से मुक्त कराने की मांग उनके छोटे बेटे की छह बेटियों ने प्रशासन से की है। बाबा की पत्नी राम बेटी शर्मा थीं और उन दोनों के दो पुत्र थे। बड़े पुत्र अनेक सिंह शर्मा एवं छोटे धर्म नारायण शर्मा थे। उनकी एक बेटी गिरजा भटेले हैं। अनेक सिंह शर्मा की एक बेटी और एक बेटा है। धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियां हैं।
जिलाधिकारी को दिया आवेदन
धर्म नारायण शर्मा की बेटियां अलग-अलग शहरों में बसी हैं। इनमें से सुनीता शर्मा वृंदावन में, अर्चना शर्मा और ऋतु तिवारी दिल्ली में, वंदना शर्मा मथुरा में, भावना रावत मुंबई में और ऋचा रावत गुड़गांव में रहती हैं। यह छहों बहनें 14 अगस्त को अपनी मां, यानी धर्मनारायण शर्मा की पत्नी की पुण्यतिथि पर अकबरपुर पहुंची थीं। इसी दौरान उन्होंने डीएम को एक आवेदन देकर बाबा की संपत्ति से ट्रस्ट का कब्जा हटाने की मांग की।
उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि बाबा की निजी संपत्ति पहले श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट की संपत्तियों में शामिल नहीं थी। ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने परिवार की सहमति के बिना अवैध तरीके से इस संपत्ति को ट्रस्ट में शामिल कर लिया था।
लाखों लोगों की श्रद्धा का केंद्र कैंची धाम
गौरतलब है कि संत बाबा नीब करौरी महाराज का आश्रम उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के नैनीताल में है। यह आश्रम कैंची धाम के नाम से प्रसिद्ध है। भीमताल और भुवाली कस्बे के पास स्थित इस आश्रम और मंदिर में हर साल दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु आते हैं। बाबा नीम करौरी के प्रति आस्थावान लोग दुनिया भर में हैं। बाबा ने 15 जून 1964 को इस आश्रम की स्थापना की थी। बाबा नीब करौरी का अवसान 11 सितंबर, 1973 को वृंदावन में हुआ था।
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