स्पेशल स्टोरी

मुंबई पुलिस में 6.41 करोड़ का फर्जी वेतन घोटाला, 2 कर्मचारी सस्पेंड; क्राइम ब्रांच करेगी जांच

मुंबई पुलिस में 6.41 करोड़ रुपए के फर्जी वेतन घोटाले का खुलासा होने के बाद कार्रवाई तेज हो गई है. मामले में दो पुलिस कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, जबकि 5 के खिलाफ धोखाधड़ी की FIR दर्ज की गई है

Gaurav Dwivedi
August 5, 2026
3 min read

मुंबई पुलिस में करोड़ों रुपए के फर्जी वेतन घोटाले का मामला सामने आने के बाद कार्रवाई तेज हो गई है. इस मामले में दो पुलिस कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और जालसाजी समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है. अब इस पूरे मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है.वेतन घोटाले के मामले में तत्कालीन हेड क्लर्क विजया चव्हाण और तत्कालीन जूनियर क्लर्क अमोल मेश्राम को सस्पेंड कर दिया गया है. दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. संयुक्त पुलिस आयुक्त (प्रशासन) की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जांच पूरी होने तक दोनों कर्मचारी निलंबित रहेंगे.
कैसे हुआ करोड़ों रुपए का घोटाला?

जांच में सामने आया है कि कुछ लोगों ने गैर-पुलिसकर्मियों को पुलिस कर्मचारी दिखाकर उनके नाम पर फर्जी वेतन जारी कराया. आरोप है कि फर्जी दस्तावेज, फर्जी वेतन पर्चियां और बैंक खातों का इस्तेमाल कर सरकारी धन का गबन किया गया. इस तरह सरकार को करीब 6 करोड़ 41 लाख 14 हजार 36 रुपए का नुकसान पहुंचाया गया.

5 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला

इस मामले में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी रामकिशन गोस्वामी, नागेश तलवाडेकर, विजया चव्हाण, मुख्य क्लर्क अजय राठौड़ और जूनियर क्लर्क अमोल मेश्राम समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह घोटाला प्रशासनिक और वेतन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से किया गया.

समता नगर पुलिस थाने में दर्ज FIR में आरोपियों पर BNS की धारा 409, 420, 406, 467, 465, 471, 201, 120(बी) और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है. आरोपियों पर सरकारी धन के गबन, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, जालसाजी और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

कब हुआ था यह घोटाला?

प्राथमिक जांच के अनुसार, यह घोटाला वर्ष 2019 और 2020 के दौरान हुआ. दिसंबर 2019 के अलावा जनवरी, फरवरी और जून से सितंबर 2020 के बीच जारी किए गए वेतन में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं. जांच में इन महीनों के वेतन खातों और भुगतान रिकॉर्ड में कई संदिग्ध लेन-देन पाए गए हैं.

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब समता नगर पुलिस से लेकर मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-12 को सौंप दी गई है. इससे पहले FIR समता नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी. अब क्राइम ब्रांच पूरे नेटवर्क, फर्जी बैंक खातों, वेतन रिकॉर्ड और दस्तावेजों की विस्तृत जांच करेगी.

फर्जी प्रोफाइल और बैंक खातों का इस्तेमाल

जांच एजेंसियों के अनुसार, सरकारी धन निकालने के लिए फर्जी पुलिसकर्मियों की प्रोफाइल बनाई गईं. उनके नाम पर बैंक खाते खोलकर वेतन ट्रांसफर किया गया. आशंका है कि इस पूरे खेल को अंजाम देने में प्रशासनिक और मंत्रालयी कर्मचारियों की भी भूमिका रही है. जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे और कुल कितनी राशि का गबन हुआ.

मुंबई पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है. यदि जांच में अन्य कर्मचारियों या अधिकारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल क्राइम ब्रांच इस फर्जी वेतन घोटाले से जुड़े सभी दस्तावेजों और बैंक लेन-देन की जांच में जुटी हुई है.

इस खबर को लाइक और शेयर करें

Comments (0)

0/2000 characters

Facebook टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए Facebook में लॉगिन करें

टिप्पणियां अक्षम हैं। व्यवस्थापक से संपर्क करें।

Related Stories

घाटों से लेकर विश्वनाथ धाम तक… 2014 से 2026 तक काशी में पर्यटन का कितना विस्तार?

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर वाराणसी पर्यटन को लेकर जारी आंकड़ों में बड़ा खुलासा हुआ है. वर्ष 2014 से जुलाई 2026 तक 52.71 करोड़ से अधिक भारतीय और विदेशी पर्यटक काशी पहुंचे हैं.

राम मंदिर: 72 घंटे तक चढ़ावा चोरी की घटना को चंपत राय ने दबाए रखा, फिर भी जांच में कैसे मिली क्लीनचिट?

अयोध्या पुलिस की विवेचना रिपोर्ट के मुताबिक, चंपत राय को 4 जून को चढ़ावा चोरी का वीडियो मिल गया था. 8 जून को ट्रस्ट ने इसे अफवाह बताया. चार्जशीट में 8 आरोपी और चंपत राय गवाह हैं.

यूपी चुनाव को ध्यान में रखकर तय होंगे राज्यसभा के चेहरे, स्मृति ईरानी समेत दो ब्राह्मणों के नाम की भी चर्चा

यूपी की 10 राज्यसभा सीटों को लेकर चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। माना जा रहा है कि यूपी चुनाव को ध्यान में रखकर चेहरे तय किए जा सकते हैं। इस बार जातीय संतुलन साधने के लिए नये चेहरों को जगह मिल सकती है।

'आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार', यूपी के कई शहरों में सपा के खिलाफ शुरू हुआ पोस्टर वार

प्रशासन ने बताया कि भवनों के मुआवजे का भुगतान भी हो चुका था. इसके बाद कुछ प्रभावित लोग इस मामले को लेकर हाईकोर्ट गए थे. बताया जा रहा है कि प्रशासन ने हाईकोर्ट के दिशा-निर्देश के बाद कार्रवाई की है.