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बीजेपी का 4C प्लान क्या है, जिस पर नए यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने किया फोकस, बन सकता है गेमचेंजर

बीजेपी के उत्‍तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने समाजवादी पार्टी के पीडीए का नया अर्थ बताया। उन्‍होंने कहा कि इसका मतलब है- पराया धन अपना।

Gaurav Dwivedi
September 6, 2026
2 min read
बीजेपी का 4C प्लान क्या है, जिस पर नए यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने किया फोकस, बन सकता है गेमचेंजर

लखनऊ/नई दिल्‍ली: दिखावे से दूर रहकर लेकिन राजनीति और संगठन में पूरी ताकत झोंकते हुए BJP के नए उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने आते ही अपने इरादे साफ कर दिए। राज्य के अपने पहले दौरे की शुरुआत उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर तीखा तंज कसते हुए की। फिर BJP के मिशन 2027 के लिए जमीनी काम में जुट गए।

यह भी साफ कर दिया कि उनका काम किसी एक व्यक्ति को आगे बढ़ाने के बजाय टीम वर्क पर आधारित होगा। तावड़े ने बार-बार BJP के सामूहिक नेतृत्व का जिक्र किया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी प्रमुख नितिन नबीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य संगठन शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के दौरान वे सबको साथ लेकर चलने पर जोर देंगे।

100 विधानसभा पर रहेगा खास ध्‍यान

BJP सूत्रों का कहना है कि संगठन के स्तर पर तावड़े का तुरंत ध्यान 4Cs यानी कोऑर्डिनेशन (समन्वय), कैडर (कार्यकर्ता), कास्ट (जाति) और कैंडिडेटचर (उम्मीदवारी) पर होगा। इसमें उन लगभग 100 विधानसभा क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया जाएगा जहां BJP का प्रदर्शन 2024 के लोकसभा चुनावों में खराब रहा था।

पीडीए मतलब पराया धन अपना

अपनी नई ज़िम्मेदारी के लिए राजनीतिक माहौल बनाते हुए तावड़े ने अखिलेश यादव के चर्चित PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर सीधा निशाना साधा और इस शब्द को एक नया राजनीतिक अर्थ दिया। लखनऊ पहुंचने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, PDA और SP का मतलब है 'पराया धन अपना'। NDA ऐसा कभी नहीं होने देगा। इससे संकेत मिलता है कि BJP समाजवादी पार्टी के सामाजिक गठबंधन वाले नैरेटिव का डटकर मुकाबला करने की योजना बना रही है।

कार्यकर्ताओं को भव्‍य स्‍वागत करने से रोका

विनोद तावड़े के सादे ढंग से पहुंचने से उनके काम करने का तरीका भी झलकता है। तावड़े ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे बड़े-बड़े होर्डिंग और भव्य स्वागत समारोहों से बचें। उन्होंने दिखावे के बजाय संगठन की बैठकों और चुनाव की योजना बनाने पर ध्यान देना बेहतर समझा।

विशेष खबर प्रस्तुति- गौरव द्विवेदी(संपादक)खबर युग (Khabar Yug) हिंदी न्यूज़ और मीडिया पोर्टल

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