दावा- देश में हर 3 में से 1 वकील फर्जी, अकेले इलाहाबाद में 1000 से ज्यादा फेक एडवोकेट…अब बड़े एक्शन की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी वकीलों के खिलाफ सीबीआई जांच को लेकर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है. इसमें कहा गया है कि इलाहाबाद में 1,000 से ज्यादा वकील फर्जी हैं.

देश में फर्जी वकीलों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मंगलवार को एक याचिका पर जवाब मांगा है. इसमें कहा गया है कि फर्जी वकीलों के खिलाफ एक्शन का जिम्मा केंद्रीय जांच एजेंसी यानी सीबीआई को दी जाए. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने इसे गंभीर मुद्दा बताया. याचिका में कहा गया है कि वकालत एक अहम पेशा है. यहां अगर फर्जी लोग रहते हैं, तो इससे न्यायिक संस्था की प्रतिष्ठा का हनन होगा.याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रमुख मनन मिश्रा के एक बयान का हवाला दिया गया है. इसमें उन्होंने कहा था कि बार में 30 से 40 प्रतिशत वकील फर्जी हैं. यानी हर 3 में से एक वकील देश में फर्जी हैं. इनके खिलाफ सख्त एक्शन की जरूरत है.जून 2026 में बार काउंसिल के वकील प्रशांत कुमार और विपिन नायर ने सुप्रीम कोर्ट में इस डेटा को रखा था. इन दोनों का कहना था कि इस पर जल्दी ध्यान देने की जरूरत है. क्योंकि, यह बड़ा मुद्दा है.
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
राजा चौधरी नामक एक वकील ने यह याचिका दाखिल है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान राजा चौधरी ने कहा कि वकालत के पेशे का दुरुपयोग किया जा रहा है. जो लोग सही में वकील नहीं हैं, वो इसके नाम पर वसूली कर रहे हैं. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करवाई है.
इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हां 105 वकीलों का मामला सामने आया है. याचिकाकर्ता ने इस दौरान कहा कि 1000 से ज्यादा फर्जी वकील इलाहाबाद बार में हैं. याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह अन्य राज्यों का मामला भी है.
दरअसल, कुछ दिन पहले कफील खान बनाम उत्तर प्रदेश के एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि वकालत के पेश में माफिया लोग बैठे हैं. इन पर कार्रवाई की जरूरत है. इसके बाद यूपी में फर्जी वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की गई है.
इलाहाबाद में बार काउंसिल की सिफारिश पर 68 वकीलों के खिलाफ एफआईआर की गई है. यूपी पुलिस का कहना है कि करीब 100 एफआईआर दर्ज होने हैं. इसे धीरे-धीरे अमल में लाया जाएगा, ताकी कोई व्यवधान न हो.
भारत में कितने वकील हैं?
अगस्त 2023 में कानून मंत्रालय ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत में इस वक्त 20 लाख रजिस्टर्ड एडवोकेट हैं. बार काउंसिल के मुताबिक हर साल करीब 80 हजार के आसपास वकील इनरोल हो रहे हैं. वकालत पेशे में आने के लिए लॉ की डिग्री अनिवार्य है.
इसके अलावा बार काउंसिल ऑफ इंडिया एक टेस्ट लेता है, जिसे पास करने के बाद ही प्रैक्टिस की परिमशन मिलती है. वहीं वकीलों की प्रैक्टिस की असलियत जांचने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस वेरिफिकेशन रूल्स-2015 का इस्तेमाल करता है.
इसके तहत हर 5 साल में वकीलों की प्रैक्टिस के बारे में जानकारी जुटाई जाती है. वकीलों को बार काउंसिल से यह बताना होता है कि वे फिलहाल कहां प्रैक्टिस कर रहे हैं और कब से प्रैक्टिस कर रहे हैं.
सही जानकारी न देने पर बार काउंसिल के पास वकीलों के खिलाफ एक्शन लेने का अधिकार है.
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