हैंटावायरस: अंटार्कटिक क्रूज पर दुर्लभ क्लस्टर, तीन मौतें, WHO अलर्ट
अंटार्कटिका के क्रूज पर हैंटावायरस के दुर्लभ क्लस्टर से तीन मौतें हुईं, WHO ने अलर्ट जारी किया है।

लखनऊ, 14 मई 2026 — दक्षिण अटलांटिक में एक क्रूज जहाज पर हैंटावायरस के संक्रमण का दुर्लभ क्लस्टर सामने आया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। आठ मामले सामने आए हैं, जिनमें से छह की पुष्टि हो चुकी है। तीन मरीजों की मौत हो गई है। मृत्यु दर लगभग 38% दर्ज की गई है।
क्या है हैंटावायरस?
हैंटावायरस एक RNA वायरस है जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृन्तकों में पाया जाता है। ये वायरस मनुष्यों में incidentally फैलते हैं। संक्रमण आमतौर पर कृन्तकों के मूत्र, मल या लार से निकले एरोसोल कणों को सांस के जरिए अंदर लेने से होता है।
दुनिया में दो मुख्य प्रकार के सिंड्रोम देखे जाते हैं:
हैंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) — अमेरिका में आम, फेफड़ों में तेजी से तरल भरने और सांस लेने में तकलीफ का कारण बनता है। मृत्यु दर 30-50% तक हो सकती है।
हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) — यूरोप और एशिया में ज्यादा पाया जाता है।
दक्षिण अमेरिका में एंडीज वायरस (Andes Virus) विशेष रूप से खतरनाक है क्योंकि यह सीमित स्तर पर व्यक्ति-से-व्यक्ति में भी फैल सकता है। यही वायरस इस क्रूज क्लस्टर के लिए जिम्मेदार पाया गया है।
क्रूज जहाज पर क्या हुआ?
2 मई 2026 को अर्जेंटीना के उशुआइया बंदरगाह से MV Hondius क्रूज जहाज अंटार्कटिका की यात्रा पर रवाना हुआ था। कुछ दिनों बाद यात्री और क्रू सदस्यों में तेज बुखार, सांस की तकलीफ और गंभीर श्वसन समस्या देखी गई।
प्रारंभिक जांच में कोई चूहा जहाज पर नहीं मिला, जिससे साफ है कि संक्रमण व्यक्ति-से-व्यक्ति संपर्क से फैला। चिली और अर्जेंटीना में पहले भी एंडीज वायरस के ऐसे क्लस्टर दर्ज किए जा चुके हैं। प्रभावित यात्रियों को यूरोप और अमेरिका के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। निकट संपर्क में आए सभी लोगों को 42 दिनों तक क्वारंटाइन में रखा जा रहा है।
लक्षण और बचाव
इनक्यूबेशन पीरियड: 1 से 8 सप्ताह (ज्यादातर 2-4 सप्ताह)।
प्रारंभिक लक्षण:
तेज बुखार, थकान, मांसपेशियों में तेज दर्द (खासकर जांघ, कमर और पीठ में)
सिरदर्द, चक्कर आना
उल्टी, दस्त, पेट दर्द
4-10 दिनों बाद फेफड़ों में तरल भरने लगता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। समय पर ICU देखभाल, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर से कई मरीज बचाए जा सकते हैं। अभी तक कोई विशेष एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है।
बचाव के उपाय:
घर को चूहों से मुक्त रखें
चूहों के मल-मूत्र साफ करते समय मास्क और दस्ताने जरूर पहनें
सतह को ब्लीच या डिसइंफेक्टेंट से साफ करें
जंगलों या चूहों वाले क्षेत्रों में सतर्क रहें
विशेषज्ञों की राय
संक्रमणशास्त्र विशेषज्ञों का कहना है कि हैंटावायरस व्यक्ति-से-व्यक्ति आसानी से नहीं फैलता, इसलिए महामारी का खतरा कम है। फिर भी जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण कृन्तकों के निवास क्षेत्र बदल रहे हैं, जिससे ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।
सलाह: अगर आपने हाल में चूहों वाले क्षेत्र में समय बिताया है और बुखार, थकान या सांस की समस्या हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अपडेट: WHO और संबंधित देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां इस घटना पर नजर रखे हुए हैं। अधिक जानकारी के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
यह लेख विश्वसनीय चिकित्सा स्रोतों और स्वास्थ्य संगठनों की नवीनतम जानकारी पर आधारित है।
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